Vhuman News / Sat, Apr 4, 2026
UP Politics 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दलित वोटबैंक केंद्र में आ गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के हालिया बयानों और कार्यक्रमों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव में दलित वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं।
हाल ही में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मायावती पर हमला बोलते हुए कहा कि “दलितों का सिर्फ इस्तेमाल किया गया।” वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अंबेडकर जयंती को गांव-गांव मनाने का ऐलान किया है।
इन बयानों से साफ है कि कांग्रेस और सपा, बसपा के पारंपरिक दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में हैं।
जगजीवन राम के सहारे कांग्रेस का दलित फोकस
कांग्रेस ने दलित वोटर्स को साधने के लिए अब नया दांव चला है। पार्टी 4 अप्रैल को बाबू जगजीवन राम की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। जगजीवन राम देश के पहले दलित उप प्रधानमंत्री रहे और उन्होंने 1971 के युद्ध के दौरान रक्षा मंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। उनके नेतृत्व में दलित समाज को यह संदेश मिला कि वे भी सत्ता के शीर्ष तक पहुंच सकते हैं।
मीरा कुमार के जरिए संदेश
कांग्रेस ने इस कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को आमंत्रित किया है। साथ ही दलित चिंतक रतनलाल को भी शामिल किया गया है।
इस पहल के जरिए कांग्रेस दलित समाज को यह संदेश देना चाहती है कि उनके हित कांग्रेस के साथ ही सुरक्षित हैं।
दलित वोटर क्यों हैं सबसे बड़े गेमचेंजर?
यूपी में दलित आबादी: लगभग 20-21% (4 करोड़ से ज्यादा)
84 सीटें आरक्षित
120 सीटों पर 1 लाख+ दलित वोटर
वरिष्ठ पत्रकारों के मुताबिक, 2012 के बाद मायावती के कमजोर पड़ने से दलित वोट बिखर गया है।
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रभाव में दलितों का बड़ा हिस्सा बीजेपी के साथ गया, लेकिन 2024 में गैर-जाटव दलितों का रुझान बदलता दिखा।
दलित वोट का गणित: जाटव vs गैर-जाटव
उत्तर प्रदेश में दलितों की 66 उप-जातियां हैं, लेकिन 6 जातियां सबसे प्रभावशाली हैं:
जाटव (बसपा का कोर वोट)
पासी
कोरी
धोबी
खटिक
वाल्मीकि
जाटव वोट जहां अब भी बसपा के साथ जुड़ा माना जाता है, वहीं गैर-जाटव दलितों में लगातार राजनीतिक बदलाव देखा जा रहा है।
क्या बसपा का वोट बैंक टूटेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कांग्रेस और सपा, बसपा के मजबूत दलित वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर गैर-जाटव दलित पूरी तरह विपक्ष के साथ जुड़ते हैं, तो 2027 का चुनाव पूरी तरह बदल सकता है।
2027 का यूपी विधानसभा चुनाव सिर्फ जातीय समीकरण नहीं, बल्कि दलित वोट की दिशा तय करेगा।
कांग्रेस और सपा जहां नए प्रतीकों और कार्यक्रमों के जरिए दलितों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं बसपा के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने की बड़ी चुनौती है।
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