Vhuman News / Sun, Jun 21, 2026
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये के दान, नकदी की गिनती और सोना-चांदी के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं के आरोपों ने पूरे मामले को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया, जिसे पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जांच के दौरान SIT ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया, दान पेटियों से नकदी निकालने और उसकी गिनती की प्रक्रिया को समझा तथा ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और बैंक कर्मियों से पूछताछ की। रिपोर्टों के अनुसार जांच का फोकस कैश काउंटिंग सिस्टम, रिकॉर्ड मेंटेनेंस और दान राशि के बैंक तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पर है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ऑडिट के दौरान नकदी प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में कमियां सामने आईं। वहीं कुछ आरोपों में सीसीटीवी फुटेज और कीमती चढ़ावे के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दान और चढ़ावे का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है तथा जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि सत्य सामने आने दिया जाए और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि SIT की जांच जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने और बिना तथ्यों के निष्कर्ष न निकालने की अपील की है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्या निकलकर आता है और क्या यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर वास्तव में किसी बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन