05 Jun 2026
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विश्व पर्यावरण दिवस पर लॉन्च होगी ‘पीपल की छांव में : पीपल बाबा ने साझा किया 48 साल का हरित सफर

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मेरठ: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। देशभर में हरियाली और वृक्षारोपण अभियान के लिए पहचान बनाने वाले पीपल बाबा (स्वामी प्रेम परिवर्तन) अपने लगभग 48 वर्षों के अनुभवों को पुस्तक ‘पीपल की छांव में’ के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

पीपल बाबा ने अपने जीवन में करीब 2.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ढाई करोड़ से अधिक पेड़ और उतनी ही झाड़ियां लगाने का कार्य किया है। मेरठ में उन्होंने सेना की विभिन्न यूनिटों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया है। इसके अलावा किचन गार्डन एसोसिएशन के सहयोग से साकेत और बाउंड्री रोड क्षेत्र में दो माइक्रो फॉरेस्ट विकसित किए गए हैं तथा कई स्कूलों में हरियाली अभियान भी चलाया गया है।

यूपी पर्यटन विभाग ने उन्हें हस्तिनापुर में पौधारोपण के लिए आमंत्रित किया है। सौंदर्यीकरण कार्य पूरा होने के बाद वहां भी बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा।

गिव मी ट्रस्ट के वेस्ट यूपी और उत्तराखंड प्रोजेक्ट मैनेजर जगदीश ठाकुर के अनुसार, मेरठ के उल्देपुर स्थित वर्मी कम्पोस्ट प्लांट में करीब 350 बेड्स हैं, जहां हर महीने 60 से 70 टन जैविक खाद का उत्पादन होता है। इस परियोजना से 10 महिलाओं को रोजगार भी मिला है। पीपल बाबा के नेतृत्व में मोदीनगर फॉरेंसिक साइंस लैब, निवाड़ी में 10 हजार पेड़ लगाए गए हैं, जबकि खतौली के उमरपुर लिसोड़ा गांव में एक सेंटर नर्सरी भी संचालित की जा रही है।

पीपल बाबा बताते हैं कि बचपन से ही पीपल के पेड़ ने उन्हें आकर्षित किया। उत्तराखंड के जंगलों, कॉर्बेट, राजाजी, हरिद्वार, ऋषिकेश, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उनका मानना है कि प्रकृति ने इंसान को खुले आसमान और हरियाली के बीच जीने के लिए बनाया है।

उनकी नई पुस्तक ‘पीपल की छांव में’ इसी प्रकृति प्रेम, संघर्ष और पर्यावरण संरक्षण की यात्रा का दस्तावेज है। यह पुस्तक पेंग्विन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की जा रही है और जल्द ही अमेजन सहित विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगी।

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