Vhuman News / Mon, Apr 6, 2026
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने एक बड़ा ऐलान किया है, जो आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
सोमवार को भाजपा के स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि प्रदेशभर में जहां भी B. R. Ambedkar की प्रतिमा होगी, उसके ऊपर छत्र लगाया जाएगा। इसके साथ ही Ravidas और Valmiki की प्रतिमाओं का सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा।
सीएम योगी ने बताया कि 14 अप्रैल को Ambedkar Jayanti के अवसर पर भाजपा कार्यकर्ता बूथ स्तर पर एक दिन पहले साफ-सफाई अभियान चलाएंगे और जयंती के दिन प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। साथ ही जिन पार्कों में ये प्रतिमाएं हैं, वहां बाउंड्री और सौंदर्यीकरण का कार्य भी शुरू किया जाएगा।
गोरखपुर के रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान योगी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि “भारत जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, उसके विरोधी षड्यंत्र करेंगे, इसलिए हमें सतर्क रहना होगा।”
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “सिर्फ साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गंदगी की सफाई भी जरूरी है, क्योंकि यह देश और प्रदेश को नुकसान पहुंचाती है।”
सीएम योगी ने भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पार्टी ने जो वादा किया, उसे पूरा किया। उन्होंने Atal Bihari Vajpayee और L. K. Advani के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण के संकल्प का जिक्र किया और Jammu and Kashmir से अनुच्छेद 370 हटाने को बड़ी उपलब्धि बताया।
इस दौरान योगी ने गोरखपुर में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में ध्वजारोहण किया, प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और डॉ. तेज प्रताप शाही कंप्यूटर लैब का उद्घाटन भी किया। डॉ. शाही को याद करते हुए सीएम भावुक हो गए और अपनी आखिरी मुलाकात का जिक्र किया।
राजनीतिक मायने:
योगी आदित्यनाथ ने बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की प्रतिमा के सौंदर्यकरण का फैसला 2027 में होने वाले चुनाव से जुड़ा हुआदेखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 20.7% है, जो 2027 चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। राज्य में दलितों की 66 उप-जातियां हैं, जिनमें से 6 प्रमुख उप-जातियां 87% हिस्सेदारी रखती हैं।
जाटव समुदाय को बसपा का कोर वोटर माना जाता है, जबकि पासी, कोरी, धोबी, खटिक और वाल्मीकि जैसे गैर-जाटव दलितों में वोट का बंटवारा ज्यादा रहता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस और सपा जहां दलित जयंती कार्यक्रमों के जरिए इस वर्ग को साधने में लगी हैं, वहीं भाजपा भी इस घोषणा के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
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