Vhuman News / Thu, Jan 29, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वे जिस परंपरा से आते हैं, वह भारत की सबसे प्राचीन योगिक और संन्यासी परंपराओं में से एक — नाथ संप्रदाय है।
नाथ संप्रदाय केवल धार्मिक संप्रदाय नहीं, बल्कि योग, साधना, अनुशासन और समाज सेवा पर आधारित जीवन दर्शन है।
‘नाथ’ शब्द का अर्थ है — स्वामी या गुरु।
नाथ संप्रदाय में ‘नाथ’ वह है जिसने
इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो
योग साधना में सिद्धि प्राप्त की हो
सांसारिक मोह से ऊपर उठ चुका हो
इसी कारण इस संप्रदाय के साधुओं को नाथ योगी कहा जाता है।

नाथ संप्रदाय की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं, लेकिन इसकी जड़ें बहुत प्राचीन मानी जाती हैं।
नाथ परंपरा का संबंध आदि योगी भगवान शिव से जोड़ा जाता है
भगवान शिव को पहला नाथ (आदिनाथ) माना जाता है
गुरु परंपरा:
आदिनाथ (शिव) → दत्तात्रेय → मत्स्येंद्रनाथ → गोरखनाथ

9वीं–10वीं शताब्दी में नाथ संप्रदाय को संगठित किया
हठयोग को व्यवस्थित रूप दिया
सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया
नाथ संप्रदाय की विचारधारा व्यावहारिक और अनुभव आधारित है।
मुख्य सिद्धांत:
शरीर नश्वर नहीं, साधना का माध्यम है
योग से ही आत्मज्ञान संभव है
कर्म, ज्ञान और भक्ति का समन्वय
जाति-भेद और आडंबर का विरोध
गुरु को सर्वोच्च स्थान

नाथ संप्रदाय को हठयोग का जन्मदाता माना जाता है।
हठयोग के प्रमुख अंग:
आसन
प्राणायाम
मुद्रा और बंध
ध्यान
कुंडलिनी जागरण
नाथ योगियों का मानना है कि शरीर और मन को साधकर ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।
नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेना आसान नहीं होता। दीक्षा के बाद योगी को आजीवन नियमों का पालन करना पड़ता है।
ब्रह्मचर्य का कठोर पालन
त्याग और संन्यास
भिक्षा पर जीवन यापन
नियमित योग और साधना
गुरु आज्ञा सर्वोपरि
साधारण जीवन, उच्च विचार
लोभ, क्रोध, मोह से दूरी

नाथ योगियों की पहचान उनके जीवन-शैली और प्रतीकों से होती है।
कानों में कुंडल (योग मुद्रा)
भस्म (विभूति) का प्रयोग
गेरुआ या भगवा वस्त्र
जटा या मुंडित मस्तक
योग दंड और कमंडल
कानों में कुंडल धारण करने के कारण इन्हें कानफटा योगी भी कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ नाथ संप्रदाय का प्रमुख पीठ है।
गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि
शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के कार्य
धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र

योगी आदित्यनाथ का वास्तविक नाम अजय सिंह बिष्ट है।
उन्होंने युवावस्था में सांसारिक जीवन त्याग कर नाथ संप्रदाय में दीक्षा ली।
गोरखनाथ मठ के पीठाधीश्वर (महंत)
गुरु अवैद्यनाथ के शिष्य
संन्यासी रहते हुए सार्वजनिक जीवन में प्रवेश
योगी आदित्यनाथ का मानना है कि राजनीति भी सेवा और साधना का माध्यम हो सकती है।

नाथ संप्रदाय केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन भी रहा है।
समाज सुधार
राष्ट्र चेतना
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा
जनकल्याण की भावना
नाथ संप्रदाय भारत की उस प्राचीन परंपरा का प्रतीक है जो योग, त्याग और अनुशासन को जीवन का आधार मानती है।
योगी आदित्यनाथ इसी परंपरा से निकलकर आधुनिक राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे नाथ संप्रदाय एक बार फिर चर्चा में है।
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