Vhuman News / Sat, Jan 17, 2026
गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तराखंड से एक बेहद खास और प्रतीकात्मक उपहार मिला है। अब योगी आदित्यनाथ शेरों वाली खास कुर्सी पर विराजमान होंगे, जो केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना में बची देवदार की पवित्र लकड़ी से तैयार की गई है।
इस अनोखी कुर्सी को उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल ने 15 जनवरी, मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर गोरखपुर पहुंचकर योगी आदित्यनाथ को भेंट किया।

गोरक्षपीठ के लिए भेंट, सीएम को आई बेहद पसंद
योगी आदित्यनाथ न केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, बल्कि गोरखपुर स्थित गोरक्षनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर भी हैं। यही कारण है कि यह कुर्सी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि गोरक्षपीठ के महंत के रूप में भेंट की गई।
कुर्सी योगी आदित्यनाथ को इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे तुरंत गोरखनाथ मंदिर के मुख्य सभागार में स्थापित करवा दिया।

केदारनाथ प्रोजेक्ट से जुड़ी पवित्र सोच
कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना के दौरान देवदार की लकड़ी का बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ था, जिसमें से कुछ लकड़ी शेष बच गई थी।
उनके मन में विचार आया कि इस पवित्र लकड़ी का उपयोग किसी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ी वस्तु के निर्माण में किया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने योगी आदित्यनाथ के लिए इस विशेष कुर्सी को बनवाने का निर्णय लिया।
सिंह आकृति और मंदिर शैली की नक्काशी
कुर्सी का डिजाइन प्रसिद्ध आर्किटेक्ट कृष्ण कुडियाल ने तैयार किया। उन्होंने उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों की वास्तुकला का गहन अध्ययन कर डिजाइन को अंतिम रूप दिया।
कुर्सी के दोनों हत्थों पर सिंह की आकृति उकेरी गई है, जो शक्ति, साहस और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती है। वहीं पीछे की ओर उत्तराखंड के मंदिरों में दिखाई देने वाली पारंपरिक नक्काशी को दर्शाया गया है।

महासू मंदिर की काष्ठकला और भगवा रंग
इस कुर्सी में खासतौर पर महासू मंदिर की काष्ठकला की झलक देखने को मिलती है। कुर्सी की गद्दी भगवा रंग की है, जो योगी आदित्यनाथ का प्रिय रंग माना जाता है और सनातन परंपरा का भी प्रतीक है।
कुर्सी को चकराता के पास कोटा गांव के पारंपरिक काष्ठ कारीगरों ने करीब 15 दिन की मेहनत के बाद तैयार किया।
देवदार की सौंधी सुगंध से महकता सभागार
इस कुर्सी की एक खास विशेषता यह भी है कि देवदार की लकड़ी से निकलने वाली सौंधी और प्राकृतिक सुगंध पूरे सभागार में फैल रही है, जिससे वातावरण और अधिक पवित्र और शांत हो गया है।

उत्तराखंड से यूपी तक भावनात्मक जुड़ाव
गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था। उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट और माता सावित्री देवी हैं। योगी कुल सात भाई-बहनों में पांचवें स्थान पर हैं और मात्र 22 वर्ष की उम्र में सन्यास ग्रहण कर योगी जीवन को अपनाया।
कौन हैं कर्नल अजय कोठियाल?
कर्नल अजय कोठियाल 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद धाम के पुनर्निर्माण का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने आम आदमी पार्टी से उत्तराखंड विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर लड़ा, हालांकि सफलता नहीं मिली। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और वर्तमान में उत्तराखंड सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हैं।

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