Vhuman News / Tue, Feb 17, 2026
Mohan Bhagwat ने मंगलवार को लखनऊ प्रवास के दौरान सामाजिक सद्भाव, जनसंख्या, घुसपैठ, जाति व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे। वे 17 और 18 फरवरी को लखनऊ दौरे पर हैं। पहले दिन निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में उन्होंने विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद किया।
मुस्लिम समाज और ‘घर वापसी’ पर बयान
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी इसी भूमि के मूल निवासी हैं और उन्हें अलग नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने ‘घर वापसी’ अभियान को गति देने की बात कही और कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनकी देखभाल और मार्गदर्शन भी जरूरी है।
घुसपैठ पर सख्त रुख
उन्होंने बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए कहा कि घुसपैठियों को “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” करना चाहिए और उन्हें रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए।
जनसंख्या दर पर टिप्पणी
हिंदुओं की घटती जनसंख्या दर पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि समाज को भविष्य सुरक्षित रखने के लिए कम से कम तीन बच्चों की आवश्यकता है। वर्तमान में जनसंख्या दर 2.1 बताई जाती है, जिसे उन्होंने अपर्याप्त कहा। उनके अनुसार, जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, उसका अस्तित्व भविष्य में संकट में पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि विवाह का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख नहीं बल्कि सृष्टि और समाज की निरंतरता होना चाहिए। इसी सोच से कर्तव्यबोध पैदा होता है।
जातिवाद और सामाजिक समरसता
भागवत ने समाज में बढ़ती जातीय विषमता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जाति के कारण समाज में विभाजन नहीं होना चाहिए। इसे खत्म करने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन होना चाहिए। यदि किसी को कानून गलत लगता है तो संवैधानिक तरीके से उसे बदलने का प्रयास करना चाहिए। किसी भी मुद्दे को जातीय संघर्ष का कारण नहीं बनाना चाहिए।

संघ प्रमुख ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग भारत की सद्भावना के खिलाफ योजनाएं बना सकते हैं। इससे सावधान रहने और आपसी विश्वास मजबूत करने की जरूरत है।
भागवत ने कहा कि मातृशक्ति परिवार का आधार है। महिलाओं को अबला नहीं बल्कि शक्ति स्वरूपा माना जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया।
उन्होंने विश्वास जताया कि निकट भविष्य में भारत विश्व का मार्गदर्शन करेगा और अनेक वैश्विक समस्याओं का समाधान भारत के पास है।

1 दिसंबर (पुणे): भारत को विश्व मंच पर उचित स्थान मिलने की बात कही।
18 नवंबर (गुवाहाटी): भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं, हमारी सभ्यता स्वयं इसकी पहचान है।
13 दिसंबर (अंडमान): यह भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं।
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