Vhuman News / Fri, Jan 16, 2026
यूपी : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर अपराध, जांच और राजनीतिक संरक्षण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कोडिन कफ सिरप से जुड़े मामले में आरोपी बताए गए धनंजय सिंह के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही इस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। अब धनंजय सिंह का बीजेपी में जाना विपक्ष के इन आरोपों को और हवा दे रहा है कि क्या राजनीतिक दल में शामिल होना ही कार्रवाई से बचने का रास्ता बन गया?

कोडिन कफ सिरप एक ऐसी दवा है, जिसका इस्तेमाल मेडिकल जरूरतों के लिए किया जाता है, लेकिन इसके नशीले दुरुपयोग के चलते इसे NDPS एक्ट के तहत नियंत्रित किया गया है। देश के कई राज्यों में इसे ड्रग्स की तरह तस्करी के मामलों में जब्त किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक,
पिछले 5 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 1,200 से अधिक कोडिन कफ सिरप से जुड़े केस दर्ज हुए।
इनमें 400 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई।
कई मामलों में जांच अब भी लंबित है।
इन्हीं मामलों के बीच धनंजय सिंह का नाम राजनीतिक आरोपों के केंद्र में आया।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंचों और प्रेस बयानों में आरोप लगाया था कि
कोडिन कफ सिरप के कारोबार से जुड़े लोगों को सत्ताधारी दल का संरक्षण मिल रहा है।
जिन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, उन पर या तो जांच आगे नहीं बढ़ती या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
हालांकि, इन आरोपों पर उस समय कोई ठोस कानूनी कार्रवाई या सार्वजनिक सफाई सामने नहीं आई।

यहां से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।
आमतौर पर NDPS एक्ट के मामलों में त्वरित कार्रवाई, गिरफ्तारी और सख्त कानूनी प्रक्रिया देखने को मिलती है।
लेकिन धनंजय सिंह से जुड़े मामले में विपक्ष का आरोप है कि जांच की रफ्तार धीमी रही।
विपक्ष पूछ रहा है कि
क्या बीजेपी में शामिल होना पहले से तय था?
और क्या इसी वजह से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी?
धनंजय सिंह के बीजेपी में शामिल होते ही यह मामला सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव बन गया।
विपक्ष का दावा है कि यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कैसे सत्ता के करीब आने से सवाल दब जाते हैं।
वहीं, बीजेपी की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
कानून बनाम राजनीति
यह मामला एक बार फिर वही पुराना सवाल खड़ा करता है—
क्या कानून सबके लिए बराबर है?
या फिर राजनीतिक प्रभाव जांच और कार्रवाई की दिशा तय करता है?

NDPS जैसे सख्त कानूनों के बावजूद, अगर आरोपों पर स्पष्ट कार्रवाई या जवाब नहीं आता, तो जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
फिलहाल, धनंजय सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक दावों तक सीमित हैं।
जब तक जांच एजेंसियों या सरकार की ओर से कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती, तब तक यह मामला
राजनीतिक आरोप,
आंकड़ों के सवाल,
और कानून की निष्पक्षता पर बहस का विषय बना रहेगा।
लेकिन इतना तय है कि कोडिन कफ सिरप जैसे गंभीर मुद्दे पर उठे सवालों ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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