Vhuman News / Mon, Jan 19, 2026
देवरिया : जिला जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को जिला न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। पत्नी के नाम जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। जेल प्रशासन को कोर्ट का परवाना मिलने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
हालांकि, इसी केस में उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

गिरफ्तारी और अनशन का मामला
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को 9 दिसंबर की देर रात शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस कार्रवाई से नाराज अमिताभ ठाकुर ने जेल में अनशन शुरू कर दिया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। पहले उन्हें गोरखपुर और फिर लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया था।
कोर्ट ने क्यों दी जमानत
सोमवार को देवरिया जिला न्यायालय में अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने दलील दी कि मामला बेहद पुराना है और इसमें किसी प्रकार की आपराधिक मंशा साबित नहीं होती। उन्होंने कहा कि यह विवाद दस्तावेजों में हुई त्रुटियों से जुड़ा है, न कि किसी सुनियोजित धोखाधड़ी से। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता का हवाला दिया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला जज ने कहा कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और जांच के लिए लगातार हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने अमिताभ ठाकुर को जमानत देने का आदेश पारित किया।
नूतन ठाकुर को नहीं मिली राहत
इसी मामले में अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर की अग्रिम जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब उनके पास राहत पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। गिरफ्तारी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 1999 का है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया में एसपी के पद पर तैनात थे। देवरिया औद्योगिक क्षेत्र में एक प्लॉट उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम से खरीदा गया था।
आरोप है कि रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों में नूतन ठाकुर का नाम नूतन देवी और पति का नाम अमिताभ ठाकुर की जगह अभिजात दर्ज कराया गया।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर धोखाधड़ी और कूटरचना का आरोप लगाया गया। दावा किया गया कि जानबूझकर गलत नाम और पहचान दर्ज कराई गई, जिससे आगे चलकर कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ।
कई वर्षों तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा, लेकिन सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में केस दर्ज किया गया। जांच के बाद पुलिस ने अमिताभ ठाकुर को आरोपी मानते हुए 10 दिसंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेज दिया।
आगे क्या
जिला अदालत से जमानत मिलने के बाद अमिताभ ठाकुर को राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी जारी है। वहीं नूतन ठाकुर के लिए स्थिति फिलहाल चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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