पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मुद्दा तेजी से चर्चा में है। मुर्शिदाबाद में बन रही कथित ‘बाबरी मस्जिद’ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह मुद्दा मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के लिए चुनावी नुकसान का कारण बन सकता है?
दरअसल, मुर्शिदाबाद जिला पहले से ही संवेदनशील माना जाता है और यहां की राजनीति में धार्मिक और सामाजिक समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं। ‘बाबरी मस्जिद’ जैसे नाम का इस्तेमाल इस मुद्दे को और ज्यादा विवादित बना रहा है, जिससे विपक्ष को बड़ा मौका मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य की लगभग 124 सीटों पर इस मुद्दे का सीधा या अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। खासकर उन इलाकों में जहां हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक का संतुलन बेहद नाजुक है।
विपक्षी दल इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं और सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस इसे एक स्थानीय धार्मिक निर्माण का मामला बता रही है और किसी भी तरह के विवाद से इनकार कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मुद्दा चुनावी हवा बदल देगा, या फिर Mamata Banerjee अपनी रणनीति से इसे संभाल लेंगी?
आने वाले समय में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में कितना बड़ा असर डालता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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