अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ। वे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं।
उनके पिता फिल्म जगत से जुड़े थे और मुंबई में वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे।
पवार परिवार की जड़ें बारामती की सहकारी राजनीति से जुड़ी रहीं। दादा गोविंदराव पवार सहकारी व्यापार में थे, जबकि दादी खेती संभालती थीं।
अजित के बड़े भाई श्रीनिवास पवार कृषि और ऑटोमोबाइल सेक्टर के बड़े कारोबारी हैं। कहा जाता है कि अजित कई अहम फैसलों में आज भी भाई की सलाह लेते थे।
अजित ने महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी हाई स्कूल, बारामती से पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही पिता का निधन हो गया। बाद में उन्होंने कोल्हापुर स्थित शिवाजी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।
शुरुआत में अजित पवार, शरद पवार के पर्सनल सेक्रेटरी रहे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था—
“मैं बचपन से अपने चाचा से डरता था, लेकिन परिवार में हमेशा आपसी प्यार रहा। मुझे लगता है कि परिवार और पार्टी को अलग रखना चाहिए।”

अजित पवार ने पूर्व मंत्री पदम सिंह पाटिल की बहन सुनेत्रा पवार से शादी की। उनके दो बेटे हैं—जय पवार और पार्थ पवार।
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले उनकी चचेरी बहन हैं, जिनसे उनका रिश्ता राजनीतिक मतभेदों के बावजूद निजी तौर पर मधुर रहा।
अजित पवार ने 1982 में राजनीति में कदम रखा। वे सबसे पहले एक को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में चुने गए।
1991 में वे पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16 साल तक इस पद पर रहे।
1993 में पहली बार बारामती से लोकसभा सांसद बने, लेकिन उपचुनाव में चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी। यहीं से जीतकर शरद पवार केंद्र की सरकार में रक्षा मंत्री बने।
1995 में अजित पवार पहली बार बारामती से विधायक बने। इसके बाद 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार जीत दर्ज की।
1999 में विलासराव देशमुख सरकार में उन्हें सिंचाई मंत्री बनाया गया।

22 नवंबर 2019 को महाविकास अघाड़ी की अहम बैठक चल रही थी। अगली सुबह चौंकाने वाली खबर आई—देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री और अजित पवार डिप्टी सीएम बन चुके थे।
वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र दीक्षित अपनी किताब 35 डेज में लिखते हैं कि बैठक के दौरान एक फोन कॉल के बाद अजित का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था।
अजित पवार ने ANI से कहा था—
“राज्य को स्थायी सरकार चाहिए थी, बातचीत कहीं नहीं पहुंच रही थी।”
हालांकि, यह सरकार सिर्फ 80 घंटे में गिर गई।
अजित को मनाने की जिम्मेदारी सुप्रिया सुले को दी गई। बाद में उनकी मां प्रतिभा पवार से बात कराई गई।
शरद पवार के दबाव और विधायकों के समर्थन खिसकने के बाद अजित वापस एनसीपी में लौट आए।
1999 से 2009 के बीच सिंचाई मंत्री रहते हुए अजित पवार पर करीब 70 हजार करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप लगे।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर चीनी मिलों की बिक्री की जांच हुई। पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दी, हालांकि ईडी ने इसका विरोध किया और 2021 में जरंदेश्वर चीनी मिल की संपत्ति जब्त की।
अजित ने आरोपों को साजिश बताया और कहा—
“महाराष्ट्र बनने में 42 हजार करोड़ लगे, 70 हजार करोड़ कहां से आएंगे?”

मई 2023 में शरद पवार के इस्तीफे और फिर वापसी से अजित पवार नाराज हो गए।
2 जुलाई 2023 को उन्होंने 30 विधायकों के साथ शिंदे सरकार में शामिल होकर पांचवीं बार डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।
फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने एनसीपी का चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ अजित पवार गुट को दे दिया।
“अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” (2013)
“वोट नहीं दिया तो गांव का पानी बंद कर देंगे।” (2014)
2024 में माना—“बहन के खिलाफ पत्नी को लड़ाना गलती थी।”
विज्ञापन
विज्ञापन