Admin / Thu, Dec 18, 2025
जांजगीर-चांपा 18 दिसम्बर 2025/ महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत बनी निजी डबरी भले ही श्रीमती फोटोबाई केंवट के नाम पर स्वीकृत रही हो, लेकिन परिस्थितियों ने इसे श्री तीजराम के जीवन का सबसे बड़ा सहारा बना दिया। पत्नी के निधन के बाद तीजराम के लिए जीवन अचानक खाली-सा हो गया था। घर, खेती और परिवार सब कुछ एक साथ संभालना उनके लिए आसान नहीं था। ऐसे समय में यही डबरी उनके संघर्ष की साथी बन गई। जिले के एक साधारण से गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत किया गया निजी डबरी निर्माण आज ग्रामीण आजीविका का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है।
जनपद पंचायत अकलतरा की ग्राम पंचायत बनाहिल में हितग्राही मूलक कार्य के रूप में स्वीकृत यह डबरी न केवल रोजगार का साधन बनी, बल्कि एक परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने का आधार भी बनी। मनरेगा योजना अंतर्गत 1,58,278 रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति के साथ यह कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। कुल 1,48,192 रूपए की लागत से सम्पन्न इस कार्य में 52 परिवारों द्वारा 842 मानव दिवस का सृजन हुआ। इससे न केवल ग्रामीणों को रोजगार मिला, बल्कि जल संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकता की भी पूर्ति हुई। डबरी निर्माण से क्षेत्र में जल संग्रहण, भू-जल स्तर में सुधार और आसपास के खेतों को सिंचाई सुविधा भी मिली।
डबरी निर्माण कार्य ग्राम पंचायत, रोजगार सहायक एवं तकनीकी सहायक के समन्वय से पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम अधिकारी, सरपंच, रोजगार सहायक एवं तकनीकी सहायक के मार्गदर्शन में यह कार्य ग्राम पंचायत के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। आज यह सफलता की कहानी अन्य ग्रामीणों के लिए संदेश है कि मनरेग�
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