सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि नियमों के कई प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है।
कोर्ट ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और नियमों का ड्राफ्ट दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने केंद्र से सवाल किया—
“हम जातिविहीन समाज की दिशा में कितना आगे बढ़े हैं? क्या अब हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं?”

UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ को नोटिफाई किया था। यह नियम 15 जनवरी से देशभर के सभी UGC मान्यता प्राप्त कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में लागू कर दिए गए थे।
इन नियमों का उद्देश्य SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव को रोकना और उच्च शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही तय करना बताया गया है।

UGC ने पहली बार 17 दिसंबर 2012 में कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में जातीय भेदभाव रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे, लेकिन वे सिर्फ सलाह तक सीमित थे और उनमें कोई सजा या अनिवार्यता नहीं थी।
2016 में हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला और 2019 में महाराष्ट्र की डॉक्टर पायल तडवी की आत्महत्या के बाद इस मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप ले लिया।
29 अगस्त 2019 को दोनों पीड़ितों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नियमों को सख्त बनाने की मांग की।
IIT की एक स्टडी में दावा किया गया कि ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों के 75% छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव का सामना करते हैं।
जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने UGC को भेदभाव से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने और नए नियम बनाने का निर्देश दिया।

नए नियमों में कहा गया है कि जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता या नस्ल के आधार पर किया गया कोई भी अनुचित व्यवहार, जो पढ़ाई में बराबरी में बाधा बने, जातीय भेदभाव माना जाएगा।
अब SC/ST के साथ-साथ OBC छात्रों के खिलाफ भेदभाव को भी नियमों के दायरे में लाया गया है।
ड्राफ्ट में झूठी शिकायत पर जुर्माने और सस्पेंशन का प्रावधान था, जिसे फाइनल नियमों से हटा दिया गया।

हर कॉलेज में Equal Opportunity Centre (EOC) बनेगा
EOC के तहत इक्विटी कमेटी गठित होगी
SC/ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग सदस्य कमेटी में होंगे
शिकायत मिलने पर 24 घंटे में प्रारंभिक कार्रवाई
15 दिन में रिपोर्ट और 7 दिन में आगे की कार्रवाई अनिवार्य
UGC को सालाना रिपोर्ट भेजना जरूरी
नियमों का उल्लंघन करने पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है या UGC मान्यता भी रद्द हो सकती है।

आरोप है कि नियमों में जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार मानने का कोई प्रावधान नहीं है।
इससे दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आलोचकों का कहना है कि इससे कमेटी एकतरफा हो सकती है।
मान्यता रद्द होने के डर से संस्थान निष्पक्ष निर्णय नहीं ले पाएंगे।

UGC नियमों के खिलाफ सोशल मीडिया पर #UGCRollback ट्रेंड कर रहा है और ई-मेल कैंपेन चलाया जा रहा है।
जहां तमिलनाडु CM एमके स्टालिन ने नियमों का समर्थन किया है, वहीं बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने इसे समाज को बांटने वाला बताया है।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब सरकार और UGC को नए सिरे से नियमों पर विचार करना होगा।
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