Vhuman News / Wed, Jan 21, 2026
दिल्ली : सरकार ने मंगलवार को नेशनल हाईवे पर टोल वसूली से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। अब टोल का भुगतान न करने वाले वाहनों को NOC, फिटनेस सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट जैसी अहम सेवाएं नहीं मिलेंगी। ये बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 2026 के तहत किए गए हैं। सरकार का मकसद इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को मजबूत करना और टोल चोरी पर पूरी तरह लगाम लगाना है।
अक्सर देखा गया है कि टोल प्लाजा पर फास्टैग स्कैन होने के बावजूद टेक्निकल खामी या कम बैलेंस की वजह से टोल नहीं कट पाता और गाड़ियां आगे निकल जाती हैं। अब ऐसे मामलों में टोल की बकाया राशि सीधे वाहन के डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ दी जाएगी।

अगर किसी वाहन पर टोल बकाया पाया गया, तो निम्न सेवाएं तब तक रोक दी जाएंगी, जब तक भुगतान नहीं हो जाता—
1. नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC):
वाहन को बेचने या एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने के लिए एनओसी जरूरी होती है। अब बिना टोल क्लियरेंस के एनओसी जारी नहीं की जाएगी।
2. फिटनेस सर्टिफिकेट:
कॉमर्शियल और अन्य वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट का रिन्युअल या नया सर्टिफिकेट तब तक नहीं मिलेगा, जब तक पुराना टोल बकाया जमा न हो।
3. नेशनल परमिट:
ट्रक और बस जैसे कॉमर्शियल वाहनों को नेशनल परमिट जारी करने से पहले यह जांच की जाएगी कि वाहन पर कोई टोल बकाया तो नहीं है।

पूरा सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमेटेड होगा, जिसे तीन चरणों में समझा जा सकता है—
1. टोल प्लाजा पर सेंसर और कैमरा:
जैसे ही वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, RFID रीडर फास्टैग स्कैन करता है। अगर बैलेंस कम है या फास्टैग ब्लैकलिस्टेड है, तो वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर रिकॉर्ड हो जाता है। आने वाले समय में लागू होने वाले मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम में बिना बैरियर के हाई-डेफिनिशन कैमरे सीधे नंबर प्लेट कैप्चर करेंगे।
2. NPCI और बैंक को सूचना:
टोल प्लाजा से मिली जानकारी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) सिस्टम को भेजी जाती है, जिसे NPCI मैनेज करता है। यहां यह तय होता है कि पैसा क्यों नहीं कटा।
3. ‘वाहन’ पोर्टल से डेटा लिंक:
NPCI यह जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ‘वाहन’ पोर्टल को भेजता है। इसके बाद इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर टोल बकाया वाहन के डिजिटल रिकॉर्ड में जुड़ जाता है।

नए नियमों में सरकार ने ‘अनपेड टोल यूजर’ की भी साफ परिभाषा तय की है। अगर किसी वाहन की आवाजाही ETC सिस्टम (फास्टैग) में रिकॉर्ड हुई है, लेकिन भुगतान नहीं हुआ है, तो उसे बकाया माना जाएगा।
यानी कम बैलेंस होने के बावजूद टोल पार करना अब भारी पड़ सकता है।
यह कदम भविष्य में लागू होने वाले MLFF टोलिंग सिस्टम की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस सिस्टम में न टोल प्लाजा होंगे और न ही बैरियर। गाड़ियां बिना रुके गुजरेंगी और टोल अपने आप कट जाएगा।
लंबी कतारें खत्म होंगी, ईंधन की बचत होगी और ट्रैफिक स्मूथ रहेगा। इसी वजह से सरकार ने टोल भुगतान को वाहन के जरूरी दस्तावेजों से जोड़ दिया है।

NOC के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 28 में भी अहम बदलाव किए गए हैं।
अब वाहन मालिक को यह घोषणा करनी होगी कि उसकी गाड़ी पर कोई टोल बकाया नहीं है और संबंधित टोल डिटेल भी देनी होगी।
इसके साथ ही फॉर्म 28 के कुछ हिस्से अब ऑनलाइन पोर्टल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किए जाएंगे।
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