Vhuman News / Mon, Apr 13, 2026
उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) की तुलना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों की सीटों पर ज्यादा वोटर कम हुए हैं। यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस बात की आशंका जता चुके थे। उन्होंने पार्टी और संगठन की बैठकों में साफ कहा था कि यदि बूथ स्तर पर मजबूती नहीं लाई गई, तो आगामी चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है।
403 सीटों पर SIR का असर
प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर कुल मिलाकर करीब 2.04 करोड़ वोटर कम हुए हैं। औसतन हर सीट पर लगभग 13.24% मतदाता घटे हैं।
हालांकि, जब आंकड़ों को गहराई से देखा गया तो पता चला कि सपा की तुलना में भाजपा की सीटों पर ज्यादा असर पड़ा है।
शहरी सीटें (102)
सपा: 26 हजार से 1.07 लाख तक वोट कम
NDA: 26 हजार से 3.16 लाख तक वोट कम
ग्रामीण सीटें (301)
सपा: 16 हजार से 79 हजार तक वोट कम
भाजपा: 15 हजार से 1.42 लाख तक वोट कम
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सीनियर जर्नलिस्ट के मुताबिक, 2017 और 2022 के चुनावों की तुलना करें तो जीत-हार का अंतर काफी कम हो गया था। भाजपा ने 2022 में 60 से ज्यादा सीटें 10 हजार से कम अंतर से जीती थीं। ऐसे में वोटर कम होना भविष्य के चुनावों में बड़ा फैक्टर बन सकता है।
हाई प्रोफाइल सीटों पर असर
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर शहर)
यहां सबसे कम यानी सिर्फ 6.88% वोट कम हुए हैं। संख्या के हिसाब से करीब 33 हजार वोट घटे हैं।
साहिबाबाद सीट
सबसे ज्यादा असर इसी सीट पर पड़ा है, जहां करीब 3.16 लाख वोटर कम हुए हैं।
लखनऊ कैंट (ब्रजेश पाठक)
करीब 1.24 लाख वोट घटे, जबकि जीत का मार्जिन सिर्फ 39 हजार था।
कुंडा (राजा भैया)
यहां 55 हजार वोट कम हुए, जबकि जीत का अंतर 30 हजार था।
चुनावी समीकरण बदलेंगे?
कई सीटों पर वोट घटने का आंकड़ा जीत के मार्जिन से भी ज्यादा है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर परिणाम बदल सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही कार्यकर्ताओं को चेताया था कि बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ानी होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस स्थिति से निपटने के लिए क्या नई रणनीति अपनाती है।
SIR के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। खासतौर पर भाजपा के लिए यह एक चेतावनी की तरह है, जबकि विपक्ष के लिए मौका।
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